बाली की आधी शक्ति खींचने वाले वरदान से अंजान दिगविजयी रावण ने बाली को अचानक एक ऐसा घुस्सा मारा की दर्द से कराहता बाली दूर जा गिरा ! और जैसे ही बाली ने ये देखा की यह दुस्साहस रावण ने किया है। बाली के क्रोध का ठिकाना न रहा। बाली क्रोध से गर्जना करते हुए उठा और पास ही परे एक चट्टान को उठाकर रावण की ओर ऐसे फेंका की रावण दर्द से कराहता हुआ दूर जा गिरा। बस फिर क्या था ! बाली और रावण दोनों को समझ आ गया की आज के युद्ध में विजय पाना आसान नहीं होगा।
बाली और रावण दोनों ही तीव्र गति से गर्जना करते हुए एक दूसरे की ओर प्रहार करने के लिए दौरते हुए जा रहे थे। बाली अपनी विशाल गदा को ऐसे पकरे दौर रहे थे की एक ही गदा में रावण का अंत कर देंगे। वही रावण अपने हाथ में भगवान शिव से प्राप्त चन्द्रहास खरग लिए ऐसे जा रहा था मानो एक ही प्रहार में बाली का सर धर से अलग कर देगा। और तभी एक प्रचंड आवाज के साथ बाली की विशाल गदा और रावण की शक्तिशाली खरग के बीच भयानक टक्कर होते ही ऐसा विस्फोट हुआ मानो पृथ्वी पर प्रलय शुरू हो गया हो। यह विस्फोट इतना भयानक था की बाली तथा रावण दोनों ही उस विस्फोट से दूर जा गिरे। दोनों ने एक-दूसरे को घूरकर देखा।
और रावण ने तुरंत अपने माया से अग्नि के अनेक गोले को प्रगट कर बाली की ओर प्रहार कर दिया। और जैसे ही अग्नि के वे गोले बाली के ऊपर बरसने वाले थे, वैसे ही बाली ने अपने गदे को प्रणाम कर कोई मंत्र पढ़ा और तभी बाली के चारो ओर जल रूपी एक ऐसा सुरक्षाकवच बना जिसने कुछ ही समय में रावण के माया से आये सभी अग्नि के गोलों को नष्ट कर दिया।
अपने अचूक प्रहार को नष्ट होता देख रावण अहंकार से गर्जनाकरते हुए एक भयानक काली गदा प्रगट की और बाली पर आक्रमण कर दिया। बाली ये देख थोरा सम्भले और अपनी गदा उठाकर रावण की ओर दौर परे। दोनों में भयंकर गदा युद्ध छिर गया। जब रावण गदा चलाता तो बाली अत्यंत चपलता से पीछे हटकर बच जाता और जब बाली गदा चलाता तो रावण तुरंत अपनी माया से आकाश में उरकर बच जाता फिर अगले ही पल बाली के पीछे से आकर प्रहार कर देता। कभी रावण अपने गदा से बाली पर ऐसा प्रहार करता की बाली गिर परता तो कभी बाली के भीषण प्रहार से रावण कराह उठता।
दोनों में ऐसा भयानक गदा युद्ध चल रहा था की उसके आवाज से पृथ्वी पर भूकंप का माहौल विकसित हो गया। काफी देर युद्ध के बाद जब रावण पसीने पसीने हो गया और जब उसे लगा की वो बाली को गदा युद्ध में हरा नहीं पायेगा तो वो तुरंत अदृश्य हो गया। बाली को लगा रावण सायद युद्ध से भाग खरा हुआ और तभी रावण आकाश में एक मायावी रथ में प्रगट हुआ।
और अब शुरू हुआ बाली और रावण वो भयानक युद्ध जिसने बाली को अपनी असली शक्ति दिखाने के लिए मजबूर कर दिया।
रावण ने बिना समय गवाए अपने भयानक गदा को बाली की ओर चला दिया। पहले तो बाली को समझ नहीं आया की अचानक ये क्या हुआ ! पर जैसे ही रावण की वो प्रलयंकारी गदा बाली के करीब आयी बाली ने भी दाहरते हुए तुरंत अपनी गदा से रावण की गदा की ओर प्रहार कर दिया। दोनों गदा एक दूसरे के तरफ ऐसे बढ़ रही थी मानो यह गदा नहीं ब्रह्मास्त्र हो। और तभी उस दोनों गदा के टकराने का ऐसा भयानक विस्फोट हुआ की आकाश में स्थित देवता ही कांप उठे।
रावण ने तुरंत अपना मायावी धनुष प्रगट किया और एक ऐसा बाण चलाया की वो बाण हजारो भयानक सर्पों में बदल गया और तीव्र गति से बाली को अपना ग्रास बनाने बढ़ चला। यह देख बाली ने भी अपना दिव्य धनुष प्रगट किया और एक ऐसा बाण चलाया की वो बाण हजारो गरूर में बदल गया और रावण के सभी सर्पों को नष्ट कर दिया। रावण ने अपने अनेक अस्त्रों से बाली पर प्रहार किया और बाली ने भी उसका समुचित उत्तर दिया।
पर असली रोमांच तो तब आया जब धीरे धीरे कर के रावण के सारे अस्त्र विफल हो गए और तब रावण ने क्रोध में आकर ब्रह्मशिर अस्त्र का आवाहन करने लगा। यह देख बाली क्रोध से तमतमा उठा, उसके क्रोध का ठिकाना न रहा। बाली ने अपना आकार बढ़ाना शुरू किया और अत्यंत विकराल रूप लेकर एक विशाल पर्वत उठाकर रावण के रथ पर दे मारा। रावण का रथ खंड खंड हो गया, रावण भी दर्द से कराहते हुए धराम से जमीन पर गिर परा। पर रावण तुरंत उठा और फिर से अपने धनुष से ब्रह्मशिर अस्त्र का आवाहन करने लगा।
यह देख बाली ने रावण से बोला - अहंकारी रावण तुम्हे अपनी शक्तियों पर बरा घमंड है न। आज मैं तुम्हारी शक्तिया ही तुमसे छीन लेता हूँ। और फिर बाली कोई मंत्र पढ़ने लगा और अगले ही पल बाली के गले में एक अत्यंत ही दिव्य हार प्रगट हो गया। रावण यह देख सन्न रह गया उसे समझ नहीं आ रहा था की बाली अचानक इतना उग्र कैसे हो गया। और रावण बाली की आधी शक्ति खींचने वाली जिस बात को बस किस्सा मानता था। आज उसके सामने सत्य होता दिख रहा था।
रावण यह सब सोच ही रहा था की बाली ने एक हुंकार भरी और रावण की शक्तिया बाली के शरीर में जाने लगी। रावण चीखता रहा ! चिल्लाता रहा ! पर उसकी पुकार किसी ने नहीं सुनी। और कुछ ही समय पश्चात जब बाली ने रावण की आधी शक्तिया छीन ली। तो रावण इधर उधर भागने लगा। बाली का रूप इतना विशाल था की रावण भाग भी नहीं पा रहा था। जैसे जैसे बाली काल की भांति रावण की ओर बढ़ रहा था रावण का डर बढ़ रहा था। अब रावण के शरीर में पहले जैसा बल भी नहीं रहा। और बाली का शरीर दिव्य शक्तियों से चमक रहा था। बाली गर्जना करता हुआ रावण के पास पंहुचा और उसे अपनी मुट्ठी में दबाकर ठहाके मारकर हसते हुए कहने लगा - तो क्या यही था तुहारा बल रावण ! इसी बल से तुमने देवताओ को परास्त किया था। अब देखो मैं कैसे तुम्हारा अंत करता हूँ ! इसपर रावण बोल उठा - बाली मैं रावण हूँ !
तुमने भले कुछ समय के लिए भले ही मुझे परास्त कर दिया है पर मैं इसका बदला अवश्य लूंगा। यह सुन बाली ने सोचा अगर मैंने रावण को मार दिया तो कोई मेरा विश्वास नहीं करेगा की मैंने रावण को हराया है। और ये सोच बाली ने रावण को अपनी कांख में दबा कर जंगलो पर्वतो के बीच छलांग मारने लगा। बाली जहा भी जाता सबको दिखाता - देखो मैंने रावण को हराया है और जब ऐसे ही छह महीने बित गए तो बाली की उछल कूद से घायल रावण करुण स्वर में बाली में क्षमा मांगने लगा और बाली को अपनी मित्रता का प्रस्ताव दिया। इसपर बाली ने दया कर के रावण को छोर दिया और रावण की मित्रता स्वीकार कर ली।

